काश मैं इंशान ना होकर
एक नन्ही-सी चिड़िया होती,
जो हर बंधन से दूर,
खुले आसमान में
अपने सपनों के उड़ती।।
काश मैं एक नदी होती,
जो बिना किसी शिकायत
बिना किसी परवाह
बस अपनी धुन में
निरन्तर बहती रहती।।
काश मैं वह ठंडी हवा होती,
जो अनगिनत जख्मो को
बिना कहे सहला जाती,
जो दिखती तो नही,
पर हर दिल को
सुकून दे जाती।।
काश मैं इंशान ही ना होती
तो शायद दर्द का अर्थ
इतना गहरा ना होता
और जिंदगी जीने से ज्यादा
महसूस करने कि सजा ना देता।।