विज्ञापन

वक्त-ए-जुदाई

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़यालों में तो आप हर लम्हा मौजूद थे,
        
                                                    
                            
पर हौसला-ए-बयां न कर सके,
आंखें तो आपकी भी लबरेज़ थीं आंसुओं से,
पर वक्त-ए-जुदाई न दिखा सके.

 
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile