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सुहाना सफर

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सफर हो फक़त वही जो
        
                                                    
                            
सुहाना लगे,
ख़ूबसूरत हो इतना कि
मन को छले,
गुज़रे बादलों, झीलों, और
पहाड़ों से,
मंज़िल मेरी आ गई कब,
पता न चले.

 
2 घंटे पहले
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