जारी है सफर ज़िंदगी की रेल का
दिन और रात,
और जारी है इस दौड़ में
शह और मात,
ख़ूबसूरत नज़ारे भी ख़ूब हैं
इस सफर में,
मज़ा तभी है गर खिड़की के
क़रीब हैं आप.