विज्ञापन

रुख़-ए-बिसात

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रुख़-ए-बिसात देखकर क़दम उठे,
        
                                                    
                            
तो क़दम अच्छा है,
वज़ीर के क़दमों को प्यादे से रोक दे,
वो क़दम और भी अच्छा है,
शह से आंख मिलाकर मात बचा जाना
सबके बस का खेल नहीं,
क़दम जो ए'तमाद-ए-ज़ाती से लिया जाय,
यह क़दम सबों से अच्छा है.

 
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aditya Mishra

1 कविता

View Profile

Anil Pandey

436 कविताएं

View Profile

Mamta Tiwari

646 कविताएं

View Profile