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रोशनी सूरज की

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमारी आदतें भी किन्हीं
        
                                                    
                            
पेड़ों सी अजीब हैं,
आसमां छूने को चल दिए मगर
जड़ से ग़रीब हैं,
नई पौध तरसती है सूरज की
रोशनी को,
फैला रखी हैं शाख़ें उनके सरों पर,
हम इतने शरीफ हैं.

 
2 महीने पहले
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