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दूसरों की फतह वध से पहले शायद

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ढ़ो रहा हूँ बेवजह जो वज़न,
        
                                                    
                            
अहम मेरा अपना है,
ऊंचे आसमानों को छूकर आऊं,
यही सपना है,
मंज़िल कौन सी है मेरी यहाँ,
आजतक पता नहीं,
दूसरों की फतह वध से पहले शायद,
ख़ुद को जीतना है.

 
एक महीने पहले
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