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ईश्वर के संदेश

Rajeshwari Joshi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ईश्वर के संदेश
        
                                                    
                            

पक्षी, बादल, धूप, हवा और वर्षा—
ये सब ईश्वर के मौन संदेशवाहक हैं।
ये किसी एक देश के नहीं,
पूरी धरती के हैं।

पक्षी जब उड़ते हैं,
तो अपने पंखों में
जंगलों की महक,
नदियों का संगीत
और खेतों की हरियाली
साथ ले जाते हैं।

बादल समुद्र की गोद से
जल का संदेश लेकर उठते हैं,
फिर दूर किसी प्यासी धरती पर
जीवन बनकर बरस पड़ते हैं।

हवा _
एक फूल की सुगंध
दूसरे फूल तक पहुँचा देती है।
वह नहीं जानती
कि सीमा क्या होती है।

धूप हर सुबह
हर देहरी पर
एक-सा उजाला रख देती है।
वह किसी चेहरे में
भेद नहीं करती।

नदियाँ भी
अपना जल बाँधकर नहीं रखतीं;
वे बहती हैं,
क्योंकि देना ही
उनका स्वभाव है।

प्रकृति का हर तत्व
बिना बोले
एक ही बात दोहराता है—
धरती का हृदय
कभी टुकड़ों में नहीं धड़कता।

मनुष्य ने
नक्शों पर रेखाएँ खींच दीं,
पर आकाश आज भी
अखंड है।

बादल आज भी
हर खेत की प्यास पहचानते हैं,
पक्षी आज भी
हर वन को अपना घर समझते हैं,
और हवा आज भी
हर साँस को
एक ही जीवन का हिस्सा मानती है।

शायद इसी में
ईश्वर का सबसे बड़ा संदेश छिपा है—
जहाँ प्रेम बहता है,
वहीं धरती का सच्चा देश बसता है;
और जहाँ मनुष्य मनुष्य से जुड़ता है,
वहीं से स्वर्ग की सीमा आरम्भ होती है।
-राजेश्वरी पंत जोशी
 
2 महीने पहले
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