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स्मरण से कल्याण

Rajesh Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब हृदय पर दर्द होता है, तब मन बड़ा अशांत होता है।
        
                                                    
                            
पीड़ा की धधकती ज्वाला में, हर श्वास स्वयं आघात होता है॥

जब ज़ख़्मों पर मरहम लगता है, तब अंतर्मन शांत होता है।
स्नेहसिक्त स्पर्शों की छाया में, दुःख का विष निष्प्राण होता है॥

जब गरम हवाएँ चलती हैं, मन का मिज़ाज भी गरम होता है।
तन ही क्या, मन के आँगन में भी, क्रोध का रेगिस्तान होता है॥

ज्येष्ठ दुपहरी, एक नन्ही चिड़िया सोचे, यह जल कैसा होता है?
सूखी चोंच, व्याकुल पंखों में, जीवन कितना प्यासा होता है॥

कब वो बरसे, यह सोचे चिड़िया, बरसता सावन कैसा होता है?
बादल किस स्वर में क्या गाते हैं, अंबर कैसे हँसता-रोता है॥

बरसा सावन, भीगी चिड़िया समझी, यह सावन ऐसा होता है।
बूँद-बूँद में अमृत रस घुलता है, सूना वन जब मधुबन होता है॥

तप्त धरा जब जल पीती है, हर धूल का कण हर्षित होता है।
मुरझाया अंकुर मुस्काता है, मिट्टी का मन भी हरा होता है॥

जल का मोल वही समझता है, जिसने अभाव सहा होता है।
जिसने बिन जल तड़प सही हो, उसको जल अमृत-सा होता है॥

सावन का पानी अनमोल बड़ा, शिव का गंगाजल ऐसा होता है।
तन को धोए तो बस शीतलता, मन को धोए तो शिवत्व होता है॥

बूँदें जब माथे को छू जाती हैं, अंतर का ताप विलीन होता है।
कैलाश से स्वयं शंकर का, करुणा-अभिषेक होता है॥

जब प्राणी शिवमय हो जाता है, तब मन भी शांत होता है।
अहंकार का विष गल जाता है, जीवन निर्मल होता है॥

जब भीतर गंगा बहती है, हर कण पावन धाम होता है।
जड़-चेतन सब एक प्रतीत हों, वही सृष्टि का परम ज्ञान होता है॥

दर्द, दाह, प्यास और वर्षा, सबका अपना विधान होता है।
जो पी ले अनुभव का अमृत, उसका हर क्षण वरदान होता है॥

'अगस्त्य' कहे, इस जीवन में, स्मरण से ही कल्याण होता है।
जब मन निर्झर-सा निर्मल हो, तब मानव जीवन महान होता है॥
-राजेश शर्मा 'अगस्त्य'
 
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