विज्ञापन

इतना भी नहीं

Rajesh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करता हूँ,
        
                                                    
                            
पर जान दे दूँ—
इतना भी नहीं।

तुम्हें चाहा है,
अपनी दुनिया से बढ़कर,
पर खुद को खो दूँ—
इतना भी नहीं।

तुम्हारी ख़ातिर
हर रास्ते से गुजर सकता हूँ,
मगर अपने वजूद से गुजर जाऊँ—
इतना भी नहीं।

तुम मेरी ज़िंदगी का
एक ख़ूबसूरत हिस्सा हो,
मगर पूरी ज़िंदगी ही तुम हो—
इतना भी नहीं।

प्रेम है तुमसे,
बेहिसाब है…
पर प्रेम में
खुद को मिटा दूँ—
इतना भी नहीं।
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all