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ख़्यालो का सैलाब

rajesh dube

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब ख़्यालो का सैलाब
        
                                                    
                            
दिल में उमड़ कर आता है

कुछ अधूरी बातों के साथ
कुछ अधूरे ख़्वाब लाता है

कुछ अनसुलझे सवालों के
सुलझे हुए जवाब लाता है

तो कुछ जायज जवाब पर
फिर नए सवाल उठाता है

जब ख़्यालो का सैलाब
दिल में उमड़ कर आता है

तिनके सा बना ज़ेहन को
कहां से कहां ले जाता हैं

जिस्म सोया रहता जमीं पर
जुस्तजू आस्मां ले जाता है

जब ख़्यालो का सैलाब
दिल में उमड़ कर आता है

पुराना सा था वो जो कुछ
अपने साथ बहा ले जाता हैं

एक नई सोच का सागर
दिल में फिर सजा जाता है

जब ख़्यालो का सैलाब
दिल में उमड़ कर आता है
2 महीने पहले
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