विज्ञापन

तुम्हारी अदाएं

Rajeev Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक चांदनी रात, सरोवर में अठखेलियां करते चांद को
        
                                                    
                            
देखकर ही विधाता ने रचा है तिलिस्म तुम्हारी आँखों का।

संसार के सबसे मुलायम रेशमी कीड़ों ने अपने रेशम
से बनाए हैं, जुल्फ़ें तुम्हारी।

प्रकृति ने अवश्य ही लिए हैं सुझाव, जयपुर की दीवारों को पेंट
करने वाले कारीगरों से रचते समय खूबसूरती तुम्हारे गालों की।

संसार की सबसे सुंदर मधुमक्खियों ने अपने शहद से बनाए हैं,
होंठ तुम्हारे। जिसमें शामिल है सुगंध, सरसों के फूलों की।

बसंत पंचमी के रोज ही सरस्वती पूजन के बाद ईश्वर ने घोली है
मिश्री सी मिठास, तुम्हारे नसाफत भरे शब्दों में।

बरसात में भीगी हुई कल्पवृक्ष की पत्तियों के स्पर्श से मुग्ध होकर
ऊपर वाले ने दी है कोमलता, तुम्हारी हथेलियों को।

तुम्हारे बालों के गजरे को बनाने वाला माली निस्संदेह बादशाह है,
गुलमोहर और अमलतास के पेड़ों से सजे बगीचे का।

फिरोजाबाद के सबसे उम्दा कारीगर ने बनाए हैं गुलाब,
तुम्हारी कलाई के कंगन में।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ananya Gupta

1 कविता

View Profile