दर्द जब हद से गुजर आता है
आदमी आदमी नज़र आता है॥
पूछता क्यों फिर रहा आदतन
स्याह रातों से सहर आता है॥
तूफान है कहाँ सुनता कुछ भी
कड़वाहटों का जब डगर आता है॥
धुँध में भी चीजें साफ दिखती हैं
देखने कोई जब मंज़र आता है॥
आप ही आप चुपचाप रहा करो
हक़ में तेरे कभी ज़हर आता है॥
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