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दर्द जब हद से गुजर आता है

Rajeev Upadhyay

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दर्द जब हद से गुजर आता है
        
                                                    
                            
आदमी आदमी नज़र आता है॥

पूछता क्यों फिर रहा आदतन
स्याह रातों से सहर आता है॥

तूफान है कहाँ सुनता कुछ भी
कड़वाहटों का जब डगर आता है॥

धुँध में भी चीजें साफ दिखती हैं
देखने कोई जब मंज़र आता है॥

आप ही आप चुपचाप रहा करो
हक़ में तेरे कभी ज़हर आता है॥


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7 वर्ष पहले
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