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हम भी उडकू होकर खीसें निपोर देते हैं

Rajeev Ranjan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज व्यथित होने को मन चाहता है
        
                                                    
                            
लेकिन जब तुम हंसते हो,
हम भी हस देते हैं
किसी की बहु बेटियां लुट गई
लेकिन जब तुम चटखारे लेकर
मां बाप के दिए संस्कार की बात करते हो
हम भी उडकू होकर खीसें निपोर देते हैं
 
एक घंटा पहले
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