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गलतियां भी माफ़ होती है

Rajeev Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये देख कर भी चुप रहता हूँ
        
                                                    
                            
तुम्हारी दूरिया शायद तुम्हें पसंद हो
तुम अब अलग सी रहने लगी हो
अपनी गलतियों सच साबित करती हो
अपने सिंगर का बैग फिर खोली हो
वो स्त्रियां जो तुझपे अच्छी लगती थी
वो भी खोजती हो
अब तुम्हें खाने अच्छे नहीं लगती
कभी बात करती हो बिना फोन के
मुझको तुम कह कर संबोधित करती हो
अब बच्चे भी रोज पिज्जा कहते हैं
तुम बस टाल रहीं हो मुझको
जानती हो क्यों
क्योंकि 17 साल को नया देखना छाती हो
मालूम है क्यों इसलिए कि जिंदगी में कुछ
दोहराती है वो है तुम्हारे द्वारा care करना
और मुझसे स्नेह को बरक़रार रखने....
चलो एक बार मिल जाये सुगंध और उमंग की तरह....
एक घंटा पहले
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