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जंतर- मंतर जान रहा है!

रंजीत कुमार अर्णव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जंतर -मंतर जान रहा है!
        
                                                    
                            
कितना जूल्म किया जा रहा है!
छात्र निहत्थे कितने प्यारे!
सहते हैं ओ !जुल्म है सरे !
अब तो जागो !सत्ताधारी !
कुछ तो कह ही डालो अब !
आज नही तो कल कहना होगा!
इसका मूल्य चुकाना होगा !
छात्र अपना अधिकार मांग रहे!
कोई अत्याचार नहीं कर रहे!
लोकतन्त्र की बात या ही हैं!
सम अधिकारों की बात या ही है!
अब तो तुम्हे कुछ कहना होगा !
शिक्षा तंत्र में तो,अब कुछ करना होगा!
जो अपनो को खोये हैं........?
उनको क्या तुम वापस ला पाओगें?
महलों मे रहने वाले सत्ता धारी ......?
क्या !तुम अपनो को खो पाओगें???
 
4 घंटे पहले
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