आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जंतर- मंतर जान रहा है!

                
                                                         
                            जंतर -मंतर जान रहा है!
                                                                 
                            
कितना जूल्म किया जा रहा है!
छात्र निहत्थे कितने प्यारे!
सहते हैं ओ !जुल्म है सरे !
अब तो जागो !सत्ताधारी !
कुछ तो कह ही डालो अब !
आज नही तो कल कहना होगा!
इसका मूल्य चुकाना होगा !
छात्र अपना अधिकार मांग रहे!
कोई अत्याचार नहीं कर रहे!
लोकतन्त्र की बात या ही हैं!
सम अधिकारों की बात या ही है!
अब तो तुम्हे कुछ कहना होगा !
शिक्षा तंत्र में तो,अब कुछ करना होगा!
जो अपनो को खोये हैं........?
उनको क्या तुम वापस ला पाओगें?
महलों मे रहने वाले सत्ता धारी ......?
क्या !तुम अपनो को खो पाओगें???
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर