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उम्मीदों का जनाज़ा

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उम्मीदों का जनाज़ा
        
                                                    
                            

कई लोग मेरी हार देखने को तैयार बैठे हैं,
मेरे गिरने की दुआएँ लेकर बैठे हैं।
उन्हें क्या पता, मैं ठोकरों से भी
चलना सीख चुकी हूँ।

जिस दिन मेरी जीत का सूरज निकलेगा,
हम भी मुस्कुराएँगे,
और उनकी सारी उम्मीदों का
जनाज़ा निकाल देंगे।
— रजनी
12 घंटे पहले
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