श्रेष्ठता में नाज़ुकता
श्रेष्ठ में नाज़ुकता होती है,
फूल में जैसे कोमलता होती है।
फूल को यदि पत्थर से टकराओगे,
फूल मुरझाकर मर जाएगा,
पत्थर फिर भी नहीं मरेगा।
क्योंकि पत्थर में नाज़ुकता नहीं,
केवल कठोरता होती है।
याद रखना—
जो जितना श्रेष्ठ होता है,
उसमें उतनी ही संवेदनशीलता होती है;
और जो जितना निकृष्ट होता है,
उसमें उतनी ही कठोरता होती है।
— रजनी