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समझ और साथ

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समझ और साथ
        
                                                    
                            

जो लोग आपको समझना चाहते हैं,
उन्हें किसी सफाई की जरूरत नहीं पड़ती,
वे आपकी खामोशी भी पढ़ लेते हैं,
हर बात को शब्दों में कहने की जरूरत नहीं पड़ती।

और जो आपको समझना ही नहीं चाहते,
उन्हें हजारों तर्क दे दीजिए,
हर सवाल का जवाब दे दीजिए,
फिर भी उनके मन में
आपकी कोई जगह नहीं बनती।

रिश्ते भी अजीब होते हैं,
जिन्हें सच में रिश्ता निभाना होता है,
वे परिस्थितियों से नहीं डरते,
मुश्किलें चाहे कितनी भी हों,
वे आपका हाथ नहीं छोड़ते।

और जिन्हें साथ रहना ही नहीं होता,
उन्हें बस एक बहाना चाहिए,
कभी परिस्थिति, कभी मजबूरी,
कभी आपकी कोई छोटी-सी गलती—
छोड़ने के लिए कारण नहीं,
सिर्फ बहाना चाहिए।

इसलिए हर रिश्ते को
बार-बार समझाने की कोशिश मत करो,
जो आपका है, वह आपकी खामोशी में भी आपको समझेगा,
और जो आपका होना ही नहीं चाहता,
उसे रोककर भी क्या करोगे?

रिश्ते सफाइयों से नहीं,
नीयत और निभाने की इच्छा से बचते हैं।

— रजनी
एक दिन पहले
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