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मन बचा रहे तो तन भी अपना है

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन बचा रहे तो तन भी अपना है
        
                                                    
                            

तन की चिंता करना बेकार है,
यदि मन ही बिगड़ गया,
तो तन को सँवारकर भी क्या करोगे?

जब मन ही नहीं बचा तन में,
तो उस तन का क्या करोगे,
जिसमें धड़कन तो हो,
पर जीने की चाह न हो?

बिना मन के भटकता हुआ भूत भी देख लिया,
अब भविष्य की चिंता करना भी व्यर्थ है।
कल क्या होगा, किसे पता—
जब आज ही मन से खाली हो चुके हैं हम।

इसलिए तन से पहले मन को बचाना,
क्योंकि मन रहे तो जीवन है,
मन चला जाए तो
साँसें भी बस एक आदत रह जाती हैं।
— रजनी
एक महीने पहले
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