विज्ञापन

अब खुद को मिटाना नहीं है

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब खुद को मिटाना नहीं है
        
                                                    
                            

हक़ीक़त से रूबरू हो गए हैं हम,
अब कोई ख़्वाब सजाना नहीं है।
बहुत की हैं ग़लतियाँ पहले,
अब उन्हें दोहराना नहीं है।

दोस्त बनें चाहे दुश्मन,
अब किसी से घबराना नहीं है।
जो लोग पीछे छूट गए हैं,
अब उन्हें मनाना नहीं है।

अब समझ गए हैं वजूद अपना,
दूसरों के लिए खुद को मिटाना नहीं है।
जो मिला है सबक़ ज़िंदगी से,
उसे यूँ ही भुलाना नहीं है।

अपनी ख़ुशियों का भी हक़ है हम पर,
हर दर्द को दिल में दबाना नहीं है।
अब अपनी राह खुद चुननी है,
किसी के पीछे चलकर ठोकर खाना नहीं है।
-रजनी
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all