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तेरे सुख में ही मेरी खुशी है बसी

Rajan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसका कहना, मैं तुमको ही देखूँ प्रिये,
        
                                                    
                            
चाँद भी तुमसे प्यारा नहीं है प्रिये।
चौथ का उपवास करती हूँ मैं इसलिए,
हर जनम में मिले संग तुम्हारा प्रिये।।

तेरी सूरत में चंदा निहारूँ पिया,
तेरी आँखों में सपने सँवारूँ पिया।
तेरे हाथों से जल पीके माँगू यही,
हर जनम में बनूँ मैं तुम्हारी प्रिये।।

चौथ का उपवास करती हूँ मैं इसलिए,
हर जनम में मिले बस संग तुम्हारा प्रिये।।

तेरे सुख में ही मेरी खुशी है बसी,
तेरे बिन ज़िंदगी लगती आधी-अधूरी।
सात जन्मों का बंधन निभाऊँ सदा,
प्रेम की डोर कभी न टूटे प्रिये।।

चौथ का उपवास करती हूँ मैं इसलिए,
हर जनम में मिले संग तुम्हारा प्रिये।।

-राजन सोनी 'निर्मय'
5 घंटे पहले
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