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मेरे घर में

Rais Ahmad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये घर मेरा ही नहीं तेरा भी होगा
        
                                                    
                            
मेरे घर में फूलोँ का बसेरा होगा
सूरज थक जाएगा तो शाम होगी
चाँद थक जाएगा तो सवेरा होगा
दिन और रात का फ़रक़ कैसे होगा
जब दिन में तूफ़ाँ का अँधेरा होगा
साँप किसे देखके बिल में घुस गया
वो नेवला नहीं तो कोई सपेरा होगा
तुम तो जीते जीते ही मर गए रईस
किसी परी ने जलवा बिखेरा होगा
6 घंटे पहले
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Prasoon Saxena

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