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तुम अच्छी बेटी बन जाना...

Rahul Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            है समय बडा गमगीन कि अब तुमसे मिलने की आस नहीं
        
                                                    
                            
इस जलती तपती सहरा में मुझको बिलकुल भी प्यास नहीं
है मुझे फक्र तुझ पर इतना मैं जीते जी मर सकता हूँ
ये नहीं पता था कि मैं भी खुद से इतना डर सकता हूँ
इन गर्म फिजाओं ने अब तो मेरे अश्कों को सुखा दिया
अफसोस है जाते जाते मैंने तेरे दिल को दुखा दिया
तुम मुझे सोचकर जीवन में मेरे जैसी ना बन जाना
मैं लडका ठीक नहीं लेकिन तुम अच्छी बेटी बन जाना.........
है मुझे याद जिस पल मैंने खुद को ही खुद से दूर किया
बस तू ही था जिसने मुझको फिर जीने पर मजबूर किया
इन हालातों ने भी मुझको बस घेर घेर कर मारा है
ये जिस्म रखा गिरवी तो क्या ये दिल तो सिर्फ तुम्हारा है
ये भी बतलादो मुझको कि मैं अब कितनीं ठोकर खाऊँगा
तू मांग ले सब अपना लेकिन मैं याद नहीं लौटाऊँगा
ये बडी मुसीबत आन पडी मैं पहले से तैयार नहीं
मैंने पाकर खोया तुमको ये बात मुझे स्वीकार नहीं
पर तुम ये बातें भूल के बस जीवन पथ पर बडते जाना
मैं लडका ठीक नहीं लेकिन तुम.............
पिछले कुछ वर्षों में मैंने तेरा कितना नुकसान किया
कुछ मैं रोया कुछ तुम रोये इस गम को भी अनजान किया
सांसों का चलना भी देखो कैसी मजबूरी लगता है
हर शख्स पिछडते वक्त हमें तो बहुत जरूरी लगता है
तुम सदा परिन्दों सी उडना नभ जीवन की ऊँचाई में
तू साथ नहीं मेरे तो क्या तू है मेरी परछाईं में
फिर से अश्कों ने एक बार इन पलकों को पहचान लिया
मैं कहाँ प्यार के काबिल था कुछ दिन तूने एहसान किया
बस इतनी बात सुनो मेरी खुदको मुझमें ना उलझाना
मैं लडका ठीक नहीं लेकिन तुम अच्छी बेटी बन जाना ।
राहुल यदुवंशी


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