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याद, अवसाद...

Rahul Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस दिल्लगी में
        
                                                    
                            
कुछ फायदा तो नहीं हो रहा है

बस बिना हुक्म दिए
कागज़ पर पैन चल जाता है 

रंगरलियों वाले...
सामने से चिढ़ाते हैं

'हम पैसा भी कमा रहे'
और जलाते हैं...

भगवान,
अगर मैं हूं...
उस नौकरी के लिए...

तो प्लीज सिलेक्शन करवा दो🙏

अब,
आपसे...
'हां' भरवाने के लिए...

कौनसा तर्क... बनाके लिखूं?

शायद
ये घबराहट
दूर हो जाए...

हम
काम में
मशगूल हो जाएं...

तन्हाई
के मौजूद
शूल हों चाहे

बुराई
ना कर लें
मुझसे राहें

इसलिए
मैं चलूंगा!

सतत
कदम रखूंगा!

-राहुल
20 घंटे पहले
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