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विनती

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज,
        
                                                    
                            
थकान सी हो रही

कुछ नहीं किया
यूं ही वक़्त गंवाया

विरोध करूंगा...

बातें,
सुनने को मिलेंगी...

हमें,
सुनके अनसुनी करनी होगी 

बात
दब जाएगी

बात
रह जाएगी

बस, अपनी,
बुराई ढांके जा रहा हूं

प्रभु, मैं पीड़ा,
कितनी बार दोहराऊं :(

लो,
आंखें बंद होने लगीं...

ऐसे ही नींद का इनाम... देते रहना प्रभु 🙏

जब रात
अकेले बितानी पड़े...

सब रहते बहुत दूर

करवट ले ले...
कमर हो जाती चूर

आज की हकीकत... माज़ी पे देती थूक!

कैसी बोली है?
कहां खोखली है

कुछ दिनों से, तन्हाई...
मेरी हमजोली है

विगत में थी, खामोशी समाई...
अच्छी अब दोस्ती है
-राहुल


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एक महीने पहले
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