विज्ञापन

पर मैंने पुकार तो हर समय लगाई

Rahul Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोई अच्छी याद...
        
                                                    
                            

याद,
आती ही नहीं

मुझे याद है...

मुझे, शुरू से ज़िंदगी...
थी मिली

बहुत रोने का
जी चाहता है

सबने, खुदने, मिलके
मुझे फंसाया है

अब चाहे, इस ख्वाब को ही पाने में...
ज़िंदगी, गुज़र जाए मेरी

कि किसी,
एक मुकाम के लिए तो दौड़ लगाई...

इसी की रहे तसल्ली!

अनपढ़...

पढ़े कैसे हथेली?

बहुत कम अच्छे लोग हैं
ये बात जानता हूं मैं

बस, ऐसे बुरे साथ रहें...
जो मेरा थोड़ा अच्छा कर दें

खुूब सारा अच्छा मुझसे ले लें 🫠

कभी वो दिन भी आए
मेरा नाम बदला गया हो

जो लिखके अभी दर्द उठा है
तब पढ़के, 'यही' गर्व हुआ हो...

मिठास ने
हालत बुरी कर दी :(

हयात को...
हैरान ना करे और बेख़ुदी

बरसा दो खुदा
आसमान से थोड़ी जादूगरी?

मैं नहीं हूं सच्चा
पर मैंने पुकार तो हर समय लगाई
-राहुल
15 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all