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मेरा ध्यान... पढ़ाई पे रह सके

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोई ना कोई
        
                                                    
                            
वजह हो सकती है

मेरी खुदसे,
शिकायतों की कुश्ती... क्यों चल रही है?

माफ़ करना पड़ेगा
सबको, खुदको

साफ़ करना पड़ेगा
मन को, मंज़र को

'थोड़ा' तो आज आगे बढ़ा हूं...?
मैं क्यों किसी भी चीज़ का शिकवा करूं?

क्यों ख़ुशियों को... किसी और के यहां... रखवा जाऊं?

अच्छे दोस्त
शायद, एक दो ही रहते होंगे

और, ठीक-ठाक से लोग...
भी कभी बिछड़ते ही होंगे

जाने क्या है,
जो मुझे बिखरने नहीं देता?

जानूं, मगर, क्या क्या है...
जो मुझे जुड़ने नहीं दे रहा :(

मेरे अवगुण,
थोड़े दिन दूर रह लो मुझसे?

कि संपूर्ण
मेरा ध्यान... पढ़ाई पे रह सके

ज़िंदगी
संवर जाए

बेहतरी
आ जाए

-राहुल

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2 महीने पहले
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