आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मेरा ध्यान... पढ़ाई पे रह सके

                
                                                         
                            कोई ना कोई
                                                                 
                            
वजह हो सकती है

मेरी खुदसे,
शिकायतों की कुश्ती... क्यों चल रही है?

माफ़ करना पड़ेगा
सबको, खुदको

साफ़ करना पड़ेगा
मन को, मंज़र को

'थोड़ा' तो आज आगे बढ़ा हूं...?
मैं क्यों किसी भी चीज़ का शिकवा करूं?

क्यों ख़ुशियों को... किसी और के यहां... रखवा जाऊं?

अच्छे दोस्त
शायद, एक दो ही रहते होंगे

और, ठीक-ठाक से लोग...
भी कभी बिछड़ते ही होंगे

जाने क्या है,
जो मुझे बिखरने नहीं देता?

जानूं, मगर, क्या क्या है...
जो मुझे जुड़ने नहीं दे रहा :(

मेरे अवगुण,
थोड़े दिन दूर रह लो मुझसे?

कि संपूर्ण
मेरा ध्यान... पढ़ाई पे रह सके

ज़िंदगी
संवर जाए

बेहतरी
आ जाए

-राहुल

.
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर