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कसम...

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कौन
        
                                                    
                            
क्या कहेगा?

उनसे,
क्या देखना रहेगा?

कसम लिखी हुई
एक दिल में...

मैं निभाऊंगा
हर कीमत पे!

अब,
अच्छा वाला जीवन जियेंगे 🙂

नहीं,
बार बार.... 'मन' बदलेंगे

तन्हाई
कितना अभ्यस्त करा रही है तू

अच्छा है...
मुझे मुझमें व्यस्त करा रही है तू!

करके देख लेते हैं
क्या माजरा है...

अगर काम करता है देखो...
जो सोचा पैंतरा है...🤞

शोर वालों
मेरी चुप्पी सुनो तुम

भगवान देख रहे...
तुम करो खूब ऊधम!

अब नहीं होंगी... आंखें पुर-नम
गिनाना... हम भी सुनेंगे अपने जुर्म

आहटें, आके, चली जाएंगी...

हौसलों को... ना कुचल पाएंगी!

यादें हैं कुछ, मैं माज़ी बदल नहीं सकता...

नए कल की, सुंदर तदबीर, आज लिखी जाएगी!

मस्त जी जाएगी... 


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एक महीने पहले
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