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एक जीवन

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भगवान
        
                                                    
                            
कहीं ठिकाना दे दो

परेशानियों भरा
ज़माना दे दो

मैं नहीं उनकी दीद चाहूं
बल्कि तन्हाई पे ही जीत पाऊं

कुछ तो त्याग का... सिला मिले

कच्चे धागों से ही सही... जिया सिले

मौके भी,
एक दो ही हैं

रोने की
नहीं गलती करनी है!

वो उत्साह... कहां चला गया?

मुझे उदास ही सही, मगर पाए... रस्ता

कि मेरा जीवन... कोई और लिख रहा होगा...

कभी तो कलाकार बनूं? कब तक कहानीकार रहूंगा
-राहुल


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2 महीने पहले
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