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भाग्य से बोलो, थोड़ी देर के लिए उठ जाए

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसी को
        
                                                    
                            
क्या समझाएं

क्यों हम
सबको मन में बसाए

भगवान
मुझे समझ नहीं आ रहा है

खींचातानी में
सारा समय जा रहा है :(

अनिश्चितता का
इतना लंबा समय थोड़ी ना होता है?

भाग्य से बोलो, थोड़ी देर के लिए उठ जाए

फिर सोता रहे...

उसे चाहे जितना सोना है...

मेरी
उलझन सुलझा दो 

ऐसे
दूरी... कम बना दो

मैं,
सब्र रखने को तैयार हूं!

थोड़ी
आपके रहम की भी बरसात हो...
-राहुल
एक महीने पहले
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