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ईद की रात को तुम मुझसे मिलने आना..

RAHUL RAMAN

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ईद की रात को
        
                                                    
                            
तुम मुझसे मिलने आना
चुप चुप के बहुत मिले हम
अब सीधे घर तुम आना..

पास मेरे तुम बैठकर
कुछ मुझपे प्यार बरसाना
दुनिया दारी छोड़ो
तुम अपनी बात सुनाना..

घरवालों के नफ़रत का
कोई रास्ता तुम ढूंढ लाना
बहुत रही खटास जुबां की
उन्हें तुम मीठे शब्द सुनाना..

सुलझा के घर की बात तुम
रिश्ते की बात दोहराना
उम्र भर साथ बीताने का
तुम वादा करके जाना..

ईद की रात को
तुम मुझसे मिलने आना..


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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