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ईद की रात को तुम मुझसे मिलने आना..

                
                                                         
                            ईद की रात को
                                                                 
                            
तुम मुझसे मिलने आना
चुप चुप के बहुत मिले हम
अब सीधे घर तुम आना..

पास मेरे तुम बैठकर
कुछ मुझपे प्यार बरसाना
दुनिया दारी छोड़ो
तुम अपनी बात सुनाना..

घरवालों के नफ़रत का
कोई रास्ता तुम ढूंढ लाना
बहुत रही खटास जुबां की
उन्हें तुम मीठे शब्द सुनाना..

सुलझा के घर की बात तुम
रिश्ते की बात दोहराना
उम्र भर साथ बीताने का
तुम वादा करके जाना..

ईद की रात को
तुम मुझसे मिलने आना..


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले

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