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वो ख़ुशबू है फूलों में कहाँ ठहरती

Rahul Merotha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो ख़ुशबू है फूलों में कहाँ ठहरती,
        
                                                    
                            
एक हवा का झोका आया उसे साथ ले गया।

मैंने शेर जोड़-जोड़ कर नज़म बनाया था उसे,
कोई शायर आया उसे ग़ज़ल समझ कर ले गया।

सिर्फ़ इश्क़ ही कर सका मैं उस परिंदे से,
एक सरकारी नौकर आया उसे उड़ा कर ले गया।

अब किसी को पहले जैसा नहीं मिलता मैं,
वो जाते-जाते मुझसे मेरी पहचान ले गया।

कौनसे खुदा से लिखवाई होगी उसके महबूब ने क़िस्मत,
कौनसी दुआ पढ़ कर वो मुझसे मेरा जहान ले गया।
2 महीने पहले
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