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इन आंसुओ ने कभी सवेरा नहीं देखा

Rahul Merotha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इन आसुओं ने कभी सवेरा नहीं देखा
        
                                                    
                            
राह के मुसाफ़िर ने पत्थरों को नहीं देखा,

तुम बादलों में छुपी चाँदनी सी ख़फ़ा हो
तुमने नीचे उड़ते जुगनुओं को नहीं देखा,

तेरी आँखे, तेरे बाल, तेरा चेहरा, तेरे गाल
तेरे सिवा इन आँखो ने ज़माना नहीं देखा,

नज़रे चुराने में बड़ी माहिर हो तुम,
तुम्हारी आँखो में कभी मेरा चेहरा नहीं देखा,

कुछ इस क़दर नशे में लीन रहता हूँ मैं
मयखाने से लौटते हुए अँधेरा नहीं देखा,

एक शिकायत है मेरी भी खुदा से
तेरे पास बैठ कर भी तुझे करीब से नहीं देखा ।
2 महीने पहले
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