विज्ञापन

माँ की ममता

Rahul Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रोता था जब भी मैं रातों में
        
                                                    
                            
भर कर मुझे तब वो बाहों में
कहती थी आ जा सुला दूं मैं तुझको
कैसे बता माँ भुला दूं मैं तुझको ।
दुनिया की नजर से बचाकर के मुझको
रखती थी वो तो सजाकर के मुझको
उतारे नजर मेरी लेकर बलाएं
बंद कर के वो आँखें मुझे दे दुआएं
किया था जतन जो भी मेरी खुशी का
कैसे बता माँ भुला दूं मैं उसको
कैसे बता माँ भुला दूं मैं तुझको ।
ना खाऊं मैं खाना तो भूखी वो रहती है
मेरी ही वजह से देखो दुखी भी वो रहती है
फिर भी लेकर निवाला हाथों से अपने
कहती है आजा खिला दूं मैं तुझको
कैसे बता माँ भुला दूं मैं तुझको ।
हुई जो भी गलती उसे भूल जाना
आँखों में आंसू ना कभी ले के आना
आज आए हैं आंसू आँखों में तेरी तो
बता दे क्या इनमें डुबा दूं मैं खुद को
कैसे बता माँ भुला दूं मैं तुझको ।

राहुल कुमार
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Shivam Awasthi

3 कविताएं

View Profile