कहाँ चला ऐ मेरे बेटे,
छोड़ के यूँ बीच मझधार।
भूल हुई क्या ऐसी हमसे,
यूँ कर दिया हमको बेज़ार!...
लुटा दिया सब तेरे ख़्वाबों के लिए,
ये मुनासिब नही भूल पाएँगे हम।
लुटा दिया सब तेरे ख़्वाबों के लिए,
ये मुनासिब नही भूल पाएँगे हम।
उलफ़त से जरूरी.. ये दौलत नहीं..,
प्रेम सब कुछ है.. जीने के लिए।
लुटा दिया सब तेरे ख़्वाबों के लिए!...
दूर जाकर हमें भुला दिया है तो क्या?
याद आती हैं बचपन की वो मस्तियाँ..
याद आती हैं बचपन की वो मस्तियाँ।
लौट आ, बहुत कमा लिया है पैसा,
सामने हो चेहरा छोड़ूँ जब दुनिया..
सामने हो चेहरा छोड़ूँ जब दुनिया।
शोहरत जाती नहीं साथ इंसान के,
शोहरत जाती नहीं साथ इंसान के।
है इज़्ज़त ही बहुत जीने के लिए।
लुटा दिया सब तेरे ख़्वाबों के लिए!...
कितनी हसरत से तालीम दिलाई तुम्हें,
क्या वो लम्हे तुम्हें याद आते नहीं..
क्या वो लम्हे तुम्हें याद आते नहीं।
हमारी खुशियाँ लुट गई. तो क्या?
घर अपना. तुम क्यों बचाते नहीं..
घर अपना. तुम क्यों बचाते नहीं।
दिल से दुआ निकले तेरे वास्ते..
दिल से दुआ निकले तेरे वास्ते।
न हो हादसा वो, जो सहा हमने..,
लुटा दिया सब तेरे ख़्वाबों के लिए,
ये मुनासिब नही भूल पाएँगे हम।
उलफ़त से जरूरी.. ये दौलत नहीं..
प्रेम सब कुछ है जीने के लिए।
लुटा दिया सब तेरे ख़्वाबों के लिए!...