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अहंकार और सदाचार का महत्व

Radheshyam Khatik

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक दूजे को नीचा दिखाने में,
        
                                                    
                            
कद बढ़ाकर छू लिया आकाश।
प्रतिस्पर्धा की इस अंधी दौड़ में,
अहंकार के बन गए हम दास।

अभिमान से हम मुक्त कहाँ हुए?
लघुता को छोड़ आगे ही बढ़ते रहे।
कद बढ़ाने से क़दम कहाँ बढ़े?
जहाँ से चले थे आज भी वहीं खड़े।

उड़ो न इतना भी आसमान में,
कि घर ही छूटे लौट आने तक।
गिराया है आंधी ने दरख्तों को,
हिला न पाई तितली को फूल से।

कर समर्पित तेरा ये अभिमान,
अपना ले जीवन में तू गुरु-ज्ञान।
सीख ले सदाचार तू हनुमान से,
मिल जाएगा यही तुझे परमानंद।

 
4 घंटे पहले
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