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पिता का दर्द

Radha Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आसान नहीं होता,एक बेटी का पिता होना।
        
                                                    
                            
बेटी के जन्म पर खुशियां मनाना।
मेरे घर लक्ष्मी आई है,ये सबको बताना।
उसी बेटी को समाज की नजरों से बचाकर,
भविष्य के लिए पढ़ाना और बढ़ाना।
आसान नहीं होता एक बेटी का पिता होना।

बेटी की हर जरूरत पूरी करना,
उसके सब नखरे उठाना।
मालूम है दूसरे घर भेजना है,
फिर भी अपना हक जताना।
उसे ऊंचाई तक पहुंचाना।
आसान नहीं होता एक बेटी का पिता होना।

हर सही ,गलत की पहचान कराना।
समय के साथ चले इसका ज्ञान कराना।
तथा हर परिस्थिति से लड़ सके इस काबिल बनाना।
आसान नहीं होता एक बेटी का पिता होना।

बेटी को दुनियां, जहान की खुशियां मिले
इसलिए अपने सपनों को कुर्बान करना।
बचपन से ही उसकी शादी के सपने सजाना।
राजकुमार सा वर मिले इसके लिए पूरा जोर लगाना।
आसान नहीं होता एक बेटी का पिता होना।

उसकी शादी में कोई कसर न रह जाए
दुनियां,समाज के लोग मेरी बेटी को कुछ कह न पाए।
पूरा सम्मान मिले ,इसके लिए पूरी जमा पूंजी लगाना ।
बेटी खुश रहे इसके लिए ईश्वर से गिड़गिड़ाना।
आसान नहीं होता एक बेटी का पिता होना।

उसे नाजों से पालना, हर ठोकर से बचाना ।
और एक दिन आंसू छिपा कर
किसी और के घर विदा कर देना ।
कब आओगी यह भी न कह पाना ।
आसान नहीं होता एक बेटी का पिता होना।
एक महीने पहले
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