लिखने के लिए नहीं लिखना चाहती हूँ मैं,
अब यूँ ही कलम नहीं उठाना चाहती हूँ मैं।
कहने के लिए नहीं कहना चाहती हूँ मैं,
अब शांत ही रह जाना चाहती हूँ मैं।
पहले से ही फैला चारों ओर शोर है,
अब और शोर नहीं बढ़ाना चाहती हूँ मैं।
दिखने के लिए नहीं दिखना चाहती हूँ मैं,
अब और कोई दिखावा नहीं चाहती हूँ मैं।
कहने के लिए नहीं कहना चाहती हूँ मैं।
अब शांत ही रह जाना चाहती हूँ मैं।
लिखने के लिए नहीं लिखना चाहती हूँ मैं,
अब यूँ ही कलम नहीं उठाना चाहती हूँ मैं।