हमें सीधा-सरल, मिडिल क्लास,मध्यवर्गीय कहते हैं
जो अक्सर खुशियों के पीछे दौड़ते-फिरते दिखते हैं
रोज़मर्रा की मुसीबतों से निपटने की तरकीबें रखते हैं
कभी उलझते से दिखते हैं कभी बिखरते से दिखते हैं
रोज़ पुरानी सड़कों पर चलकर नई उम्मीदें रखते हैं।
यूँ तो क्रांति लाने की ताकत रखने का दम भरते हैं
पर दूसरों की कही बातों पर उम्र भर हामी भरते हैं
जो खुद की कहानी लिखने की स्वयं हिम्मत रखते हैं
पुरानी डगर को काटकर नई राहों पर कदम रखते हैं
कहानी कहलाने से पहले स्वयं कहानी लिखते हैं।