यहां हर किसी से कोई ना कोई खेलना चाहता है
सब ढूंढते है खिलौना
देखो तुम भी किसी का शिकार मत होना
हमसे तो कई बार खेला गया
ना मिला किसी का साथ, मै उस भीड़ में अकेला गया
अपने हिसाब से आप से मिलते हैं जगवाले
इन निराले लोग के अंदाज हैं निराले
ये पहले जान लेते है किसकी कितनी है औकात
फिर उसी हिसाब से वो आपसे मिलते हैं ,
वो आप से करते है मुलाकात
अगर आप निकले ना उनके काम के तो
आपसे रहते है दूर दूर
वो आपको समझते है लाचार, मजबूर
यहां हर पल रंग बदलती है दुनिया
इसके अनेको रंग है
यहां जो जैसा है कुछ उतना ही उसके संग है
इसी लिए प्यारे खुद को रखो तैयार
हर चीज का यहां मोल है,
यह दुनिया है बाजार
-रविन्द्र अमन