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यह दुनिया है बाजार

Rabindra Aman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यहां हर किसी से कोई ना कोई खेलना चाहता है
        
                                                    
                            
सब ढूंढते है खिलौना
देखो तुम भी किसी का शिकार मत होना

हमसे तो कई बार खेला गया
ना मिला किसी का साथ, मै उस भीड़ में अकेला गया

अपने हिसाब से आप से मिलते हैं जगवाले
इन निराले लोग के अंदाज हैं निराले

ये पहले जान लेते है किसकी कितनी है औकात
फिर उसी हिसाब से वो आपसे मिलते हैं ,
वो आप से करते है मुलाकात

अगर आप निकले ना उनके काम के तो
आपसे रहते है दूर दूर
वो आपको समझते है लाचार, मजबूर

यहां हर पल रंग बदलती है दुनिया
इसके अनेको रंग है
यहां जो जैसा है कुछ उतना ही उसके संग है

इसी लिए प्यारे खुद को रखो तैयार
हर चीज का यहां मोल है,
यह दुनिया है बाजार
-रविन्द्र अमन
5 घंटे पहले
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