है ईमानदार, इसीलिए तन्हा है अकेला है
कितना सीधा भोला है
इसकी ईमानदारी का निकला यही बोल
सीधा तो है ही, है बड़ा बकलोल
जितने मिले सब गुरु, मिला ना कोई चेला
सबसे उपदेश के सिवा उसे कुछ नही मिला
मा बाप का जब से सर से उठ गया साया
बुरे दिन तब से आए, बुरा दौर तब से आया
जो पास था, लूट के खा गए सब भाई
और कुछ वह क्या करता, करता रहा राम दोहाई
लूट के बदले में उसको दे गए अच्छा उपहार
अच्छी नही तुम्हारी बीवी, बच्चे हैं बेकार
देख देख के हार गया, कोई मिला ना उसके जैसा
दुनिया लगी बाजार, कुछ नही अगर नही पैसा
कांप गया यह सोच कर,जब घर में गली ना दाल
तब सोचो बाहर का कैसा होगा हाल
जो जीने का सपना था ,सपना सब वो टूट गया
बाहर की नही पड़ी जरूरत, घर में ही वो लूट गया
-रविन्द्र अमन