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फिर यह देश बदलेगा

Rabindra Aman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस देश की बर्बादी में,हम सब का है योगदान
        
                                                    
                            
इसके लिए दोषी हम में से हर एक है

भेड़ों की भीड़ से निकले है,ये जो दिखते हैं शेर दो ,चार
हम इनको देख कर डर जाते हैं, मरने को हो जाते हैं तैयार

यहां बिना तख्त - ताज कोई बन जाता है राजा
तुम्हारा काम है तमाशा देखना, तुम बजाओ बैंड बाजा

इस कदर हम हो गए है कायर ,
कहां किसी की जान बचती है,
फिर काहे कहीं छुपना, काहे किसी का डर

लाखों करोड़ों हैं यहां पर एक की तूती बोलती है
यहां सरेआम किसी की जान जाती है ,
किसी की इज्जत लूटती है

शर्म नाम की चीज जब नहीं है हमारे अंदर
आओ हम सब मिलकर एक काम करते है
पहले भी हम बंदर थे, फिर से बन जाएं बंदर

कहने को तो मैं बहुत कुछ कहता,
पर कहना है बेकार, अभी भी समय है
कुछ सोचो, कुछ समझो मेरे यार

यही हाल रहा तो एक दिन टुकड़ों में टूट जाओगे
तन मन से लूटे हो, दिल दिमाग से भी लूट जाओगे

आज कल कहने से काम नहीं चलेगा
पहले खुद को बदलो, फिर यह देश बदलेगा
-रविन्द्र अमन
2 महीने पहले
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