मैं जीना नही चाहता हूं ,
मुझको मर जाने दो
ऐ मेरे महबूब मुझको अपने दिल में उतर जाने दो
मै हार गया हूं इस दुनिया का जहर पी कर
तुम आए हो तो जरा वक्त को ठहर जाने
तुम आए हो तो जाना ना अभी
लोग जिधर जाना चाहे उनको उधर जाने दो
मै कसमे अपना हर दर्द ,हर गम भूल जाऊंगा
जरा मुझको अपने दिल के आईने में नजर आने दो
मै तुझको तुझी से चुरा लूंगा
मुझको है इंतजार , जरा सावन को आने दो
आज मिलन की रात है मेरी सदियों की प्यास बुझेगी
इस चांदनी रात में तुम करलो सिंगर ,
जरा मुझको भी सँवर जाने दो
मुझको कैद करो ऐ मेरे महबूब बाहों के कैदखाने में
आज मुझको हर हद से गुजर जाने दो
-रविन्द्र अमन