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मैं चाहूं तो तुझको भूल भी सकता हूं

Rabindra Aman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पहले भी तकरार हुई थी
        
                                                    
                            
पहले भी हम टूटे थे
पर इससे पहले एक दूजे से हम इतना कहा रूठे थे ?

मुझसे रिश्ता तोड़ने से पहले कम से कम
एक बार देख लिया होता
किस कदर तेरा रूप बसा है मेरे दिल के आईने में

तुम्हारे लाख नफ़रत के बाद भी
तेरे लिए मेरे दिल में वफ़ा है
तेरा हर सितम हँस के सह लेंगे
इतना प्यार हम तुमसे करते है

उस दिन मुझको सबसे गहरा जख्म लगा था
जिस दिन तुमने खूब सिंगार किया था
और एक बार भी मेरी ओर मुड़कर नहीं देखा

इतना सब होने के बाद भी
आज भी मुझको यकीं है
कि मेरे दर्द- ए -दिल का कुछ तुझको पता नहीं है

मैं चाहूं तो तुझको भूल भी सकता हूं
पर तुम इतनी मासूम हो कि
तुझको भूल कर हमसे होगी कोई बड़ी खता

इस टूटे हुए दिल से मैं आज भी तेरा इंतजार करता हूं
और यह सोचता हूं कि कुछ अजूबा हो जाए
और तुम मुझको कुछ समझ सको

मैं तुमसे जुदा होकर इतना टूट चुका हूं
जैसे कोई शीशा टूट कर चूर चूर हो जाता हैं
और टूट कर इधर उधर बिखर जाता हैं
-रविन्द्र अमन
2 महीने पहले
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