तू करने चला किसी का भला
कहीं तू हो जाए ना खुदसे बेखबर
तू दिलाने चला घर किसी के लिए
देख तू ना हो जाए घर से बेघर
यहां किसी का काम जैसे तैसे चल जाएगा
मेरे भाई तू कुएं में मत उतर
यहां कोई किसी से कम नहीं
तू नया हैं तुझको लगता है डर
आने जाने वालों को तू बहुत देखता हैं
अपनी मंज़िल तू देख, देख अपनी डगर
कोई जीने की दुआ मांगता है
मौत आई नहीं किसीको पीके ज़हर
अगर फूल तुझको यहां ना मिला
काटों में रहकर तू करले गुज़र
जिंदा रहना यहां आसान नहीं
जीने वाले रखते है जीने का हुनर
बहुत ठोकर लगी, पर ना टूटा अमन
रोना आता नहीं दिल हुआ है पत्थर
-रविन्द्र अमन