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इसकी उम्मीद नहीं रखते

Rabindra Aman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहीं से खुशी की खबर आएगी
        
                                                    
                            
कोई खुशी का पैगाम लेकर आएगा
मैं गिर जाऊँ तो, मुझको कोई उठाएगा
इसकी उम्मीद नहीं रखते

पहले भी दिल जलाया है ,
अब भी दिल जलाएंगे
जब कभी नहीं झुके तो,
फिर काहे खुद को झुकाएंगे
मेरे वीरान गुलशन में कोई गुल खिलाएगा
इसकी उम्मीद नहीं रखते

हम अपना गीत गाएंगे,
चाहे जैसा हो अपना सूर
चाहे जैसी अपनी आवाज हो,
ये हमको है मंजूर
मेरे सूर में कोई अपना सूर मिलाएगा
आकर मेरे साथ कोई गीत गायेगा
इसकी उम्मीद नहीं रखते

जब हमको खुशी नहीं मिली तो,
थाम लिया गम का दामन
यही तो जीवन है, यह जान लिया हूं मै
यह जान लिया है मेरा मन
काहे कोई मेरे घर - आंगन आकर दीप जलाएगा
इसकी उम्मीद नहीं रखते

इस दुनिया का चलन है,
इस दुनिया का है दस्तूर
जो मजबूर लाचार हैं,
उनसे रहते हैं सब दूर
कोई व्यर्थ में क्यों मेरे पास आएगा
इसकी उम्मीद नहीं रखते

इतना तो जरूर है, उस रब पर भरोसा
उससे नहीं मिलेगा,
चाहे हर जगह से हमको मिले धोखा
चाहे यह दुनिया हमको भूल जाए
वो हमको भूल जाएगा
इसकी उमीद नहीं रखते
-रविन्द्र अमन
 
8 घंटे पहले
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